12वीं के बादप्रवेश परीक्षा
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JEE Main (इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा)

NIT, IIIT और IIT तक पहुँचने की पहली सीढ़ी — पर असली सवाल यह है कि आपके पर्सेंटाइल पर कौन-सा कॉलेज और कौन-सी ब्रांच मिलेगी।

JEE Main को NTA (National Testing Agency) आयोजित करती है और यह 12वीं PCM के बाद B.Tech/B.E. में दाखिले की सबसे बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा है। इसके स्कोर से 31 NIT, 26 IIIT, GFTI और कई प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन होता है, और IIT के लिए JEE Advanced में बैठने की पात्रता भी इसी से तय होती है। हर साल लगभग 10–12 लाख छात्र रजिस्ट्रेशन करते हैं। परीक्षा साल में दो सेशन में होती है और दोनों में से बेहतर स्कोर गिना जाता है, इसलिए दोनों सेशन देना सामान्य बात है। NTA के 16 सितंबर 2026 के नोटिस के अनुसार 2027 के Session 1 के लिए ये तारीखें प्रस्तावित हैं: 22, 23, 24, 28, 29 और 30 जनवरी 2027 (31 जनवरी रिज़र्व दिन); Session 2 आम तौर पर अप्रैल में होता है। हिंदी माध्यम के छात्र पेपर हिंदी में भी दे सकते हैं।

2026 में क्या बदला

  1. सित 2026

    NTA ने JEE Main 2027 सेशन 1 की तारीखें घोषित कीं: 22, 23, 24, 28, 29 और 30 जनवरी 2027 (31 जनवरी रिज़र्व; अस्थायी)।

    स्रोत: Sakshi Education, NTA public notice

इस रास्ते की अगली तारीखें

योग्यता

JEE Main देने के लिए 12वीं पास होना या 12वीं की परीक्षा दे रहा होना ज़रूरी है, जिसमें Physics और Mathematics के साथ एक अनुमत विषय (Chemistry, Biology, Biotechnology या तकनीकी वोकेशनल विषय) हो। परीक्षा के लिए कोई उम्र-सीमा नहीं है। 75% वाला नियम परीक्षा लिखने के लिए नहीं, बल्कि NIT, IIIT, GFTI और IIT में एडमिशन के समय लागू होता है — यानी 12वीं बोर्ड में 75% (SC/ST के लिए कम सीमा) या अपने बोर्ड के टॉप पर्सेंटाइल में होना चाहिए। इसलिए UP Board, Bihar Board या MP Board के छात्र JEE की तैयारी में बोर्ड को नज़रअंदाज़ न करें। सटीक नियम हर साल के JoSAA ब्रोशर में देखें।

परीक्षा पैटर्न की असलियत

B.E./B.Tech के Paper 1 में कुल 75 अनिवार्य सवाल आते हैं — Physics, Chemistry और Maths से 25-25। समय 3 घंटे है। सवाल MCQ और न्यूमेरिकल वैल्यू (जिसमें उत्तर एक संख्या के रूप में भरना होता है), दोनों तरह के होते हैं। सही उत्तर पर +4 और गलत पर −1 मिलता है, और मौजूदा बुलेटिन के अनुसार यह नेगेटिव मार्किंग न्यूमेरिकल सवालों पर भी लागू है — यानी अंदाज़े से तुक्का लगाना महंगा पड़ता है। कई छात्रों के लिए Chemistry सबसे जल्दी अंक देती है और Maths सबसे ज़्यादा समय खाता है, इसलिए सेक्शन का क्रम और समय बाँटने की रणनीति मॉक टेस्ट में ही तय कर लें। आपका रॉ स्कोर पर्सेंटाइल में बदला जाता है, जो उसी शिफ्ट के बाकी छात्रों के मुकाबले आपकी जगह बताता है।

तैयारी की असलियत

ईमानदार तस्वीर यह है कि JEE Main के लिए 1–2 साल रोज़ कम से कम 2 घंटे का लगातार अभ्यास चाहिए; बोर्ड के साथ "थोड़ा-बहुत" पढ़कर लगभग 75 पर्सेंटाइल आता है, जो सीधे प्राइवेट कॉलेज के एडमिशन से ज़्यादा कुछ नहीं दिलाता। कोचिंग का असली फ़ायदा अनुशासन और टेस्ट-सीरीज़ है, कोई गुप्त सामग्री नहीं। मेट्रो शहरों में 2 साल की क्लासरूम कोचिंग ₹2–5 लाख तक जाती है, और कोटा जैसे रेज़िडेंशियल हब में हॉस्टल का ₹1–2 लाख सालाना अलग लगता है; वहीं NCERT, स्टैंडर्ड किताबों और ऑनलाइन टेस्ट-सीरीज़ से सेल्फ़-स्टडी ₹25,000 से कम में हो सकती है। सेल्फ़-स्टडी करें तो 12वीं की जनवरी से पहले 11वीं के टॉपिक खत्म करें, अक्टूबर से हर हफ्ते एक पूरा मॉक दें और गलतियों की कॉपी बनाएँ — आखिरी 3 महीनों में नया पढ़ने से ज़्यादा फ़ायदा मॉक के विश्लेषण से होता है। आवेदन शुल्क मामूली है (लगभग ₹1,000–2,000 प्रति सेशन; मौजूदा बुलेटिन देखें)।

सिलेबस की असलियत

सिलेबस मोटे तौर पर 11वीं-12वीं का PCM है, जैसा NTA के ताज़ा JEE Main सिलेबस में दिया है: Physics में Mechanics, Electrostatics, Optics और Modern Physics; Chemistry में Physical, Organic और Inorganic; Maths में Calculus, Algebra, Coordinate Geometry और Trigonometry। दिक्कत सिलेबस की लंबाई नहीं, सवालों का स्तर है — बोर्ड में 90% लाने वाला छात्र भी JEE के सवालों पर अटक सकता है, क्योंकि यहाँ एक सवाल में दो-तीन कॉन्सेप्ट जुड़े होते हैं। 11वीं का हिस्सा (खासकर Mechanics और Physical Chemistry) कमज़ोर रह गया तो 12वीं में उसे पकड़ना मुश्किल होता है। Inorganic Chemistry में NCERT की लाइनें सीधे काम आती हैं।

तैयारी का रोडमैप

11वीं

PCM की मज़बूत नींव

Mechanics और Physical Chemistry को पहले ही साल में पक्का करें
हर चैप्टर में NCERT के बाद JEE-स्तर के सवाल हल करें
फ़ॉर्मूले रटने के बजाय उन्हें खुद derive करके देखें

12वीं (अक्टूबर से)

मॉक और बोर्ड साथ-साथ

हर हफ्ते एक पूरा 3 घंटे का मॉक, उसी समय पर जब असली शिफ्ट होती है
गलत और छोड़े गए सवालों की अलग कॉपी बनाएँ
75% वाले नियम की वजह से बोर्ड की तैयारी बिल्कुल न छोड़ें

Session 1 से रिज़ल्ट तक

स्कोर सुधार और काउंसलिंग

Session 1 के बाद कमज़ोर चैप्टर पहचानकर Session 2 के लिए सुधारें
JoSAA, CSAB और अपने राज्य की काउंसलिंग के रजिस्ट्रेशन की तारीखें नोट करें
पिछले साल की ओपनिंग-क्लोज़िंग रैंक देखकर कॉलेज-ब्रांच की यथार्थवादी सूची बनाएँ

अभिभावकों के लिए सलाह

माता-पिता के लिए सबसे ज़रूरी बात: JEE Main qualify करना और अच्छी सीट मिलना दो अलग चीज़ें हैं। General के लिए क्वालिफ़ाइंग कटऑफ लगभग 80–90 पर्सेंटाइल रहती है, जो सिर्फ JEE Advanced की पात्रता देती है; NIT में CS के लिए आम तौर पर 98–99 पर्सेंटाइल चाहिए, और 95 के आसपास NIT की निचली ब्रांच या अच्छे प्राइवेट कॉलेज मिलते हैं। NIT-IIIT की सीटें JoSAA काउंसलिंग से बँटती हैं और बची सीटें CSAB के स्पेशल राउंड में। इसके अलावा राज्य के रास्ते भी हैं — UP में UPTAC (AKTU के कॉलेज), बिहार में BCECEB की काउंसलिंग, MP DTE काउंसलिंग, राजस्थान का REAP, दिल्ली में JAC Delhi और हरियाणा में HSTES। इनमें सीट JEE Main रैंक से मिलती है या 12वीं के अंकों से, यह हर राज्य में अलग है, इसलिए उसकी आधिकारिक सूचना ज़रूर पढ़ें। ड्रॉप ईयर तभी सोचें जब पहले प्रयास में 90+ पर्सेंटाइल आया हो और कमी साफ़ पहचान में हो; दूसरा ड्रॉप शायद ही नतीजा बदलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या JEE Main देने के लिए 12वीं में 75% ज़रूरी है?

परीक्षा देने के लिए नहीं। 75% का नियम NIT, IIIT, GFTI और IIT में एडमिशन के समय देखा जाता है। कम बोर्ड अंक वाले छात्र परीक्षा दे सकते हैं, पर इन संस्थानों में सीट के लिए बोर्ड की शर्त पूरी करनी होगी।

99 पर्सेंटाइल नहीं आएगा, तो क्या JEE Main देना फ़ायदेमंद है?

अक्सर हाँ, पर अलग वजह से: 90–97 पर्सेंटाइल पर भी IIIT, GFTI और JEE Main से एडमिशन देने वाले अच्छे प्राइवेट कॉलेज खुलते हैं। फ़ैसला सिर्फ IIT के सपने से नहीं, उन कॉलेजों की सूची से करें जिनमें आप सच में दाखिला लेंगे।

क्या कोटा जाना या कोचिंग लेना ज़रूरी है?

नहीं। हर साल छात्र NCERT, स्टैंडर्ड किताबों और ऑनलाइन टेस्ट-सीरीज़ से सेल्फ़-स्टडी करके JEE Main निकालते हैं। जो चीज़ कोई कोचिंग नहीं दे सकती, वह है रोज़ 2+ घंटे का नियमित अभ्यास और मॉक का ईमानदार विश्लेषण। बच्चे को घर से दूर भेजने से पहले उसकी पढ़ने की आदत और मानसिक तैयारी भी देखें।

अपने राज्य की NIT में कटऑफ अलग क्यों होती है?

NIT में होम-स्टेट कोटा होता है, यानी उस राज्य के छात्रों के लिए कुछ सीटें अलग गिनी जाती हैं। इसलिए बिहार के छात्र के लिए NIT पटना या UP के छात्र के लिए MNNIT प्रयागराज की क्लोज़िंग रैंक दूसरे राज्य के छात्र से अलग हो सकती है। JoSAA की पिछली राउंड-वार रैंक में HS और OS दोनों कॉलम देखें।

JEE में अच्छा नहीं हुआ तो क्या करें?

90 से कम पर्सेंटाइल रास्ता बंद नहीं करता। विकल्प: अपने राज्य की काउंसलिंग से सरकारी या अच्छे प्राइवेट कॉलेज में वही B.Tech, BITSAT और VITEEE जैसी निजी विश्वविद्यालयों की परीक्षाएँ, या BCA/B.Sc Computer Science से 3 साल बाद वही सॉफ्टवेयर करियर। ड्रॉप ईयर तभी लें जब कमी साफ़ हो, और दो बार ड्रॉप लेने से बचें।

हमारी अंतिम सलाह

JEE Main इंजीनियरिंग का सबसे मज़बूत राष्ट्रीय रास्ता है, पर नतीजा पर्सेंटाइल, ब्रांच, कॉलेज और फीस — चारों से मिलकर तय होता है। दोनों सेशन दें, बोर्ड के 75% पर नज़र रखें, और राज्य काउंसलिंग व सस्ता बैकअप प्लान पहले से तैयार रखें।